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क्या आपके दफ्तर में है खड़े होकर काम करने की लग्जरी, समझें क्या है यह

अगर कोई आपसे कहे कि आपको ऑफिस में काम करना है और वह भी खड़े होकर तो शायद यह आपको अच्छा नहीं लगेगा। हो सकता है कुछ लोग इसे अपनी बेइज्जती भी समझ लें। लेकिन इसी बात को यूं कहा जाए कि आप चाहें तो खड़े होकर भी काम कर सकते हैं। आपको दफ्तर में यह लग्जरी दी जा रही है, तो हो सकता है आप इसे सकारात्मक ठंग से लें… अगर आप 8-9 घंटे दफ्तर मैं बैठकर काम करते हैं तो शायद आप इस लग्जरी को ज्यादा अच्छे से समझ पाएंगे। फिर आप यह भी जानते ही होंगे कि लगातार बैठे रहने के कितने नुकसान होते हैं और 8-9 घंटे का सिटिंग जॉब आपके शरीर के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। शायद यही कारण है कि दुनियाभर की कुछ चोटी की कंपनियां अपने कर्मचारियों को यह लग्जरी दे रही हैं या इस पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।

नए जमाने का कैंसर है बैठे रहना

आईफोन और मैक कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी एप्पल को कौन नहीं जानता। कैलिफोर्नियां में एप्पल ने अपने एप्पल पार्क हेडक्वार्टर में अपने कर्मचारियों को खड़े होकर काम करने की सुविधा दी है। एप्पल ने अपने कर्मचारियों की डेस्क को इसी तरह से डिजाइन किया है। कर्मचारी जब चाहे खड़े होकर काम कर सकते हैं और फिर वह बैठना चाहें तो डेस्क को उसी हिसाब से एडजस्ट कर सकते हैं। कंपनी के सीईओ टिम कुक ने साल 2015 में एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में इसे लाइफस्टाइल के लिए बेहतर बताने के साथ ही बैठे रहने को नए जमाने का कैंसर करार दिया था।

‘ग्रेट प्लेस टू वर्क’ बनना है कंपनियों का लक्ष्य

ऐसा भी नहीं है कि एप्पल पहली और इकलौती ऐसी कंपनी है, जिसने ऐसी व्यवस्था की है। इंटरनेट की बेताज बादशाह कही जाने वाली कंपनी गूगल, दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट और सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने भी अपने कर्मचारियों के लिए हाइट एडजस्ट करने वाले डेस्क बनाए हैं। इसका फायदा यह होता है कि कर्मचारी अपनी सुविधा अनुसार खड़े या बैठकर काम कर सकता है। भारत में भी कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को इस तरह की सुविधा दे रही हैं। हमारे देश में भी ‘ग्रेट प्लेस टू वर्क’ नामक एक कल्चर धीरे-धीरे पनप रहा है। इससे सिर्फ खड़े होकर काम करना ही नहीं बीन बैग पर पसर कर और दफ्तर में जहां जगह मिले वहां काम करने का चलन बढ़ने लगा है। अब भारत में भी कई मल्टीनेशनल कंपनियों में कर्मचारी अपनी मर्जी से दफ्तर की सीढ़ियों और ऑफिस लॉन में भी अपना काम निपटाते हुए मिल जाते हैं।

खड़े होकर काम क्यों?

जाहिर सी बात है ये सवाल आपके भी जेहन में होगा। साथ ही यह भी कि एप्पल के सीईओ टिम कुक ने बैठने को नए जमाने का कैंसर क्यों कहा? इन प्रश्नों के जवाब में ये कुछ प्रश्न हैं? क्या आपकी कमर में दर्द रहता है? क्या आप स्पॉन्डलाइटिस से पीड़ित हैं? क्या आपको जोड़ों में दर्द होता है? क्या आप डायबिटीज से लड़ रहे हैं? अगर इन प्रश्नों में से किसी का भी जवाब हां में है तो फिर खड़े होकर काम करने की छूट आपके लिए एक लग्जरी ही है। इस तरह की समस्या में अगर आप डॉक्टर के पास जाएं तो वह आपको बताएंगे कि 15-20 मिनट से ज्यादा लगातार न बैठें। अगर आपके पास खड़े होकर काम करने की सुविधा नहीं है तो यह आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। बार-बार अपनी सीट से उठना और काम छोड़कर टहलने से आपके बॉस भी नाराज हो सकते हैं। अगर आपको खड़े होकर काम करने की लग्जरी मिलती है तो यकीन मानिए कंपनी आपकी सेहत के बारे में सोचती है, आपका भला चाहती है।

फायदे भी अनेक हैं

डॉक्टरों के अनुसार खड़े होकर काम करने से आप मोटापे के खतरे को कम करते हैं। यही नहीं यह डायबिटीज और दिल की बीमारियों को भी कम करने में मदद करता है। इसके अलावा स्लिप डिस्क जैसी रीढ़ की हड्डी की आम बीमारियों को दूर रखने में भी यह मददगार साबित हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार बैठकर काम करने पर आप बहुत कम कैलोरी खर्च करते हैं, यही कारण है ऑफिस में बैठकर काम करने वाले लोगों का वजन तेजी से बढ़ने लगता है। खड़े होकर काम करने से आपके शरीर का पॉश्चर भी ठीक रहता है।

कितना घंटे खड़े होकर करें काम

हालांकि ऐसा कोई तय नियम नहीं है, फिर भी डॉक्टरों से बात करें तो वे आपके दफ्तर के समय का 30-40 फीसद समय खड़े होकर काम करने के लिए सुझाव देंगे। यानि अगर आप 8-9 घंटे दफ्तर में बिताते हैं तो, कम से कम 2-3 घंटे खड़े होकर स्टैंडिंग डेस्क पर काम कर सकते हैं। अगर पहले से ही किसी व्यक्ति का वजन ज्यादा हो तो उसके लिए ज्यादा देर तक खड़े होना नुकसानदेह हो सकता है। इसके लिए आप अपनी सीट से उठकर कुछ कदम चल सकते हैं और कुछ हल्के-फुल्के व्यायाम भी कर सकते हैं।

मेरे दफ्तर में स्टैंडिंग डेस्क नहीं, मैं क्या करूं…

अभी कुछ मल्टीनेशनल कंपनियों में ही स्टैंडिग डेस्क की व्यवस्था हुई है। ऐसे में बहुत से ऐसे लोग हैं, जिनके दफ्तरों में यह लग्जरी नहीं है। उनके लिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि वे हर 45 मिनट में कम से कम एक बार जरूर अपनी सीट से उठें, कम से कम 8-10 कदम चलें और कुछ मामूली व्यायाम करके ही वापस बैठें। लगातार न बैठें। इसके अलावा आरामदायक कुर्सी लें और अपनी कमर को सीधे 90 डिग्री के कोण पर रखें। कुर्सी पर पसरने की गलती ना करें, अन्यथा यह आपकी रीढ़ की हड्डी के लिए घातक हो सकती है।

और क्या-क्या हो रहे प्रयोग

दफ्तर में कर्मचारी बिना किसी दबाव और तनाव के अपने काम निपटा सकें इसके लिए लगातार मल्टीनेशनल कंपनियां प्रयास कर रही हैं। इसके लिए बीन बैग लेकर कहीं भी बैठकर काम करना, दफ्तर की बिल्डिंग में ही जिम, टेबल टेनिस, कैरम, शतरंज जैसी सुविधाओं के अलावा भी कई प्रयोग इन दिनों हो रहे हैं। दफ्तर में ही कर्मचारियों के बच्चों के लिए क्रैच की सुविधा, बच्चों को दूध पिलाने के लिए महिलाओं के लिए अलग कैबिन भी इसी श्रेणी में आते हैं। कुछ बड़ी कंपनियां तो अपने कर्मचारियों को काम के दौरान थक जाने पर पावर नैप (छोटी नींद) और लॉन्ड्री जैसी सुविधाएं भी मुहैया करा रही हैं।

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